बच्चों के लिए आसान भाषा में रामायण की 7 अच्छी-अच्छी कहानियां रामायण दुनिया के सबसे महान महाकाव्यों में से एक है. देश-विदेश में हमारा यह ग्रंथ बहुत श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है. आज भी इनसे मिलने वाली सीख क़ीमती हैं.


Short stories of Ramayana for Kids in Hindi रामायण की कहानी है कि कैसे प्रभु श्री राम ने सीता जी को छुड़ाने के लिए राक्षसों के राजा रावण से युद्ध किया? रामायण की ये अच्छी-अच्छी कहानियां, बच्चों को भक्ति, साहस, धर्म, प्यार और रिश्तों के महत्तव का सही मतलब सिखाती हैं.

अगर आप बच्चों को रामायण सुनाना चाहते हैं, तो बच्चों को श्री राम, सीता जी, हनुमान, लक्ष्मण, भरत, रावण, विभीषण और कुम्भकर्ण की दुनिया की झलकियाँ दिखाने के लिए हम बहुत ही आसान भाषा में छोटी-छोटी प्रसिद्ध कहानियां ले कर आएँ हैं.

हमें पूरा विश्वास है कि बच्चों की कहानियां बच्चों को बहुत पसंद आएँगी. बच्चों के लिए सरल भाषा में रामायण की 7 प्रेरक कहानियां सुनाइए और उन्हें आश्चर्य भरी दुनिया में ले चलिए.

बच्चों के लिए रामायण की अच्छी-अच्छी कहानियां l Short stories of Ramayana for kids in Hindi

चलिए शुरू करते है, भारत की सबसे प्रसिद्ध लघु कथाएँ.

1. डाकू से साधु बने महर्षि वाल्मीकि

आप सब जानते है कि सबसे पहले महाकाव्य रामायण महर्षि वाल्मीकि ने लिखा और देवी सीता को लव-कुश के जन्म के समय अपने आश्रम में रखा.

लेकिन क्या आपको मालूम है कि महर्षि वाल्मीकि साधु बनने से पहले डाकू थे और किसने डाकू से साधु बनने की राह दिखाई? यह सब हम आपको बताने वाले हैं, इस रामायण की कहानी में. पुरानी कहानी के अनुसार महर्षि वाल्मीकि का नाम रत्नाकर था. उनके पिता प्रचेता भगवान ब्रह्मा जी के पुत्र थे.

बचपन में एक भीलनी स्त्री ने रत्नाकर को चुरा लिया और उसे पाला. भील परिवार के लोग जंगल से गुजरने वाले लोगों को लूटा करते थे. रत्नाकर भी अपने परिवार के साथ लोगों को लूटने लगे थे और जो आसानी से नही मानता था, वे उसकी हत्या कर देते थे.

इस घटना ने बना दिया डाकू से साधु

एक दिन मुनि नारद जंगल से जा रहे थे. डाकू रत्नाकर ने उन्हें बंदी बना लिया और लूटने की कोशिश की. नारद जी ने उनसे बहुत प्यार से पूँछा कि तुम ये लूटपाट क्यों करते हो? रत्नाकर ने उत्तर दिया कि मैं अपने परिवार को पालने के लिए यह सब करता हूँ.

नारद मुनि ने पूँछा कि क्या तुम्हारा परिवार तुम्हारे इन पापों में भागीदार बनेगा? यह सुनकर रत्नाकर सोच में पड़ गए. उन्होंने मुनि को पेड़ से बाँधा और इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए घर चले गए.

जब यह प्रश्न उन्होंने अपने परिवार से पूँछा तो सबने पापों में भागीदार होने के लिए मना कर दिया. अब उनकी आँख खुल चुकी थी. उन्होंने नारद मुनि को छोड़ दिया और माफ़ी माँगी. नारद मुनि ने उन्हें राम- नाम जपने के लिए समझाया.

लेकिन रत्नाकर ठहरे डाकू, उनके मुँह से राम-राम की जगह ‘मरा-मरा’ शब्द निकल रहा था. तब नारद जी ने कहा कि तुम मरा-मरा ही बोलो इससे भी तुम्हें भगवान राम मिल जाएँगे. ‘मरा का उल्टा राम’ ही होता है.

जाप करते हुए रत्नाकर तपस्या करने लगे. वे तपस्या में इतने लीन हो गए कि दीमक ने अपना घर उनपर बना लिया. ब्रह्मा जी उनकी तपस्या से ख़ुश हुए और दर्शन दिए. ब्रह्मा जी ने रत्नाकर के शरीर पर बाम्बी देखकर उनका नाम वाल्मीकि रखा. ब्रह्मा जी ने वाल्मीकि को रामायण लिखने के लिए कहा.

संस्कृत का पहला श्लोक

महर्षि ने एक पक्षी जोड़े को देखकर संस्कृत में श्लोक बोला. वे खुद आश्चर्य में पड़ गए. उनको आश्चर्य में देखकर नारद मुनि प्रकट हुए और बोले कि यह आपका पहला संस्कृत श्लोक है. आप रामायण लिखनी शुरू करो.

पहले संस्कृत श्लोक के बाद महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत भाषा में रामायण लिखी और वह रामायण ‘वाल्मीकि रामायण’ कहलाई.
यह कहानी बच्चों की कहानियों में से सबसे अच्छी कहानी है.


2. राजा दशरथ को श्राप (Dasharatha ko Shrap)किसने और क्यों दिया था? (रामायण की कहानियां)

श्रवणकुमार अपने दृष्टिहीन माता-पिता को पानी पिलाने के लिए नदी पर पानी भरने जाते हैं, राजा दशरथ जंगल में शिकार खेलने आते हैं. दशरथ शब्द भेदी बाण चलाने में पारंगत होते हैं.

श्रवणकुमार पानी भरने के लिए नदी पर पहुँचते हैं. राजा दशरथ को लगता है कि जल पीने के लिए कोई जानवर आया है. वे उसी वक़्त बिना सोचे समझे शब्द भेदी बाण चला देते हैं.

बाण श्रवणकुमार की छाती में लगता है और वे ज़ोर से चीखते हैं. उनकी चीख सुनकर, राजा दशरथ नदी की ओर दौड़ते हैं. श्रवणकुमार अंतिम साँस ले रहे होते हैं.

दशरथ उनसे माफ़ी माँगते हैं. मरने से पहले, श्रवणकुमार दशरथ से बोलते हैं कि मेरे दृष्टिहीन माता-पिता प्यासे हैं, उन्हें यह जल पिला देना. इतना कहते ही श्रवणकुमार अपने प्राण त्याग देते हैं.

राजा दशरथ को श्राप

राजा दशरथ श्रवणकुमार के पिता ऋषि शान्तनु और माता देवी ज्ञानवती को सारी घटना बड़े शोक से बताते हैं. अपने इकलौते बेटे की मृत्यु के बारे में जानकर ज्ञानवती देवी उसी वक़्त मर जाती हैं.

श्रवणकुमार के पिता ऋषि शान्तनु क्रोध में रोते हुए राजा दशरथ को श्राप देते हैं. जिस प्रकार हमारी मृत्यु के समय हमारा इकलौता पुत्र हमारे पास नही हैं, उसी तरह तुम प्राण त्यागोगे तो तुम्हारा कोई भी पुत्र तुम्हारे पास नही होगा. जिस प्रकार अपने पुत्र के वियोग में हम बूढ़े माँ बाप मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं ठीक वैसे ही तुम्हारी मृत्यु भी पुत्र वियोग के कारण होगी.

श्राप देने के बाद ही ऋषि शान्तनु प्राण त्यागते हैं. भविष्य में राजा दशरथ, अपने सबसे प्रिय पुत्र राम के वनवास के समय मृत्यु को प्राप्त होते हैं. उस समय लक्ष्मण भी राम के साथ वन चले जाते हैं तथा भरत और शत्रुघ्न अपने मामा के वहाँ गए होते हैं.

इस प्रकार ऋषि शान्तनु का दिया श्राप सच हो जाता है. यह रामायण की लघु कथाओं में से एक है Short stories of Ramayana for kids in Hindi.


3. प्रभु श्री राम जब केवट की नाव में बैठे,फिर क्या हुआ?

भगवान राम जब चौदह वर्ष के वनवास के लिए जा रहे थे. तब राम, सीता व लक्ष्मण सरयू नदी को पार कराने के लिए केवट(नाव चलाने वाला) से कहते हैं.

केवट का नाम निषादराज था. वह गुह मछुआरों और नाविकों का मुखिया थे. श्री राम को जब वनवास हुआ. तब वे तामस नदी के पार पहुँचे. जो अयोध्या से 20 कि. मी. की दूरी पर है.

इसके बाद, उन्होंने गोमती नदी पार की और शृंगवेरपुर पहुँचे, जो निषाद राज गुह का राज्य था. यही पर उन्होंने केवट से गंगा पार कराने को कहा.

केवट उन्हें देखते ही पहचान गया कि प्रभु श्री राम आए हैं. उसने श्री राम से प्रार्थना की कि वह उनके पैर धोना चाहता है. वह उन्हें तभी अपनी नाव में बैठाएगा. वह कहता है कि मेरी नाव तो काठ की है. केवट श्री राम के चरण छूना चाहता था.

श्री राम केवट से जल लाने को और पैर धोने को कहते हैं. राम की आज्ञा पाते ही कठोते में पानी भरकर लाता है और उनके पैर धोता है. गुहराज निषाद ने श्री राम के पैर धोकर, अपने आपको धन्य माना. निषाद राज ने राम,सीता और लक्ष्मण जी को गंगा जी पार करायी और राम जी को दण्डवत प्रणाम किया.

अब राम को संकोच हुआ कि वे केवट को क्या दे? उन्होंने सीता जी की तरफ़ देखा, सीता जी ने तुरंत ही अपनी रत्नजड़ी अंगूठी निकाल कर उन्हें दे दी.

प्रभु राम ने केवट को उतराई दी. केवट ने रामचंद्र जी के पैर पकड़ लिए. मेरी दुःख, दरिद्रता आज सब ख़त्म हो गई. मैंने बहुत समय तक मज़दूरी की. आज आपने मेरी सारी ग़रीबी दूर कर दी. तब भगवान श्री राम ने उसे निर्मल भक्ति का वरदान देकर विदा किया. ये बच्चों की अच्छी -अच्छी कहानियो में से एक है


4. रामायण (सीता – हरण) की कहानियां l Sita Haran Ramayan story in Hindi

राम-रावण का युद्ध कब, कैसे और क्यों हुआ?

भगवान राम जब चौदह वर्ष का वनवास काट रहे थे, तो वे घूमते-घूमते पंचवटी पहुँचे. ये जगह उन्हें बहुत सुंदर लगी. उन्होंने वनवास के आख़िरी समय में वही रहने का फ़ैसला किया. उन्होंने पंचवटी में गोदावरी के किनारे अपनी एक छोटी-सी कुटिया बनाई और राम,सीता और लक्ष्मण वहीं रहने लगे.

राम और लक्ष्मण से शूर्पणखा का मिलना

एक दिन राक्षस कन्या शूर्पणखा घूमते-घूमते, गोदावरी नदी पहुँच गयी. पंचवटी में उसने श्री राम को देखा, उसे वे बहुत सुंदर लगे और उसने भगवान राम को शादी का प्रस्ताव दे दिया. उन्होंने शादी के लिए मना कर दिया और सीता जी की तरफ़ इशारा करके बताया कि वे उनकी पत्नी हैं.

राम ने मज़ाक़ में शूर्पणखा से कहा कि मेरा छोटा भाई मुझसे भी सुंदर है, आप उसे विवाह का प्रस्ताव दो. शूर्पणखा ने लक्ष्मण से शादी की इच्छा बताई.

लक्ष्मण ने उसे चिढ़ाते हुए कहा कि मैं तो भगवान राम और सीता जी का दास हूँ. मुझसे विवाह करके तुम भी दासी बन जाओगी. शूर्पणखा ने इतना सुनते, ही सीता जी पर हमला बोल दिया और लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी.

रामायण की कहानी का मुख्य कारण

शूर्पणखा अपने अपमान का बदला लेने के लिए, अपने बड़े भाई लंका पति रावण के पास पहुँची और रावण को युद्ध के लिए उकसाया. रावण से सीता की सुंदरता का बखान किया.

रावण अपने ‘पुष्पक विमान’ पर बैठकर, राक्षस मारीच के पास पहुँचा और उसे अपने षड्यंत्र में शामिल कर लिया. मारीच इस बुरे काम को करना नही चाहता था. लेकिन मृत्यु के डर से उसने रावण की बात मान ली.

मारीच सोने के हिरन का रूप रखकर सीता के सामने से दौड़ा. सीता जी ने श्री राम से हिरन पकड़ने को कहा. प्रभु राम ने लक्ष्मण को सीता का ध्यान रखने को कहा और हिरन के पीछे दौड़े.

हिरन के पीछे-पीछे दौड़ते शाम हो गई. राम ने हिरन को तीर मारा और वह चिल्लाया “लक्ष्मण, बचाओ लक्ष्मण सीता,सीता…. ” सीता जी डर गयीं और लक्ष्मण को राम की मदद के लिए भेज दिया.

लक्ष्मण सीता की सुरक्षा के लिए, एक रेखा कुटिया के चारों ओर खींच देते हैं. सीता मैया से कहते हैं कि भाभी ये लक्ष्मण रेखा है. इसके अंदर कोई नही आ सकता. आप इसके बाहर पाँव मत रखना. सीता माता मान जाती हैं.

रावण लक्ष्मण के जाने का इंतज़ार करता है. लेकिन लक्ष्मण रेखा के कारण कुटिया में घुस नही पाता. वह सीता माता को कुटिया से बाहर निकलने की योजना बनाता है. वह एक भिक्षुक का रूप धर लेता है और आवाज़ लगाता है “भिक्षाम देही(भिक्षा दीजिए)”.

सीता भिक्षा देने लगती है. कपटी रावण ग़ुस्सा दिखाता है कि मैं बंधन में बंधी भिक्षा नही लूँगा. आप बाहर आकर मुझे भिक्षा दो. देवी सीता ने जैसे ही लक्ष्मण रेखा के बाहर पाँव रखा.

रावण अपने असली रूप में आ गया और सीता को ज़बर्दस्ती उठाकर अपने पुष्पक विमान में बैठा लिया और लंका ले गया. इस तरह सीता माता का हरण हुआ. रामायण की कहानियां बच्चों को बहुत सारी सीख देती है. यह बच्चों की अच्छी-अच्छी कहानियो में से एक है.


5. लंका दहन (रामायण की कहानियां)

यह रामायण की कहानियों में से एक बहुत ही रोचक कहानी है. भगवान राम, सीता जी और अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ जंगल में जा रहे थे. एक दिन लंका का राजा रावण सीता को उठाकर ले गया.

अब राम और लक्ष्मण सीता जी को ढूँढने, जंगल में निकल जाते हैं और वहाँ उन्हें भगवान शिव के वानर अवतार हनुमान जी मिले. वे श्री राम के बहुत बड़े भक्त थे.

श्री राम ने उन्हें सीता हरण के बारे में बताया. हनुमान जी उन्हें बंदरो के राजा सुग्रीव के पास ले गए. राम और सुग्रीव में बहुत दोस्ती हो गई और वे सब मिलकर सीता जी को ढूँढने निकल पड़े.

ढूँढते-ढूँढते वे समुद्र के किनारे पहुँच गए. अब समस्या यह थी कि समुद्र को पार कैसे किया जाए और माता सीता के पास सूचना कैसे पहुँचायी जाएँ?

हनुमान जी ने बताया कि उन्हें ऐसी जादुई शक्ति प्राप्त है कि वे हवा के रास्ते से समुद्र को पार कर सकते हैं. अब हनुमान जी ने कहा कि सीता जी मुझे कैसे पहचानेगी?

श्री राम ने उन्हें अंगूठी दी और कहा कि सीता को यह अंगूठी देना और कहना कि बहुत जल्दी श्री राम आपको छुड़ाने आएँगे.
हनुमान जी हवा के रास्ते समुद्र को पार कर लंका पहुँच जाते हैं और वे अशोक वाटिका पहुँचते हैं. जहां रावण ने सीता जी को क़ैदकर रखा था. श्री राम की अंगूठी देते हैं और कहते है कि श्री राम आपको छुड़ाने बहुत जल्दी आने वाले हैं.

माता सीता अपनी जुड़ामनी हनुमान जी को देती हैं और कहती हैं कि ये प्रभु राम को देना और उनसे कहना कि सीता जी उनकी प्रतीक्षा कर रही हैं.

हनुमान जी को बहुत भूख लगी और सीता जी से फल तोड़कर खाने की आज्ञा लेते हैं. अब उनके मन में शरारत जगती है.
वे एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूदना शुरू कर देते हैं. उन्हें सैनिक पकड़ने आते हैं. तो वे खूब उत्पात मचाते हैं.. पूरी अशोक वाटिका, जो बहुत ही सुंदर थी उसमें उछल कूद करते हैं.

लंकापति रावण के पास ख़बर पहुँचती हैं. वह अपने पुत्र अक्षयकुमार को वानर का वध करने के लिए भेजते हैं. लेकिन हनुमान जी उल्टे अक्षयकुमार को ही मार देते हैं.

अब तो रावण बहुत क्रोधित हो जाता है. वह अपने दूसरे बेटे इंद्रजीत को पकड़ के लाने का आदेश देता है. इंद्रजीत ब्रहमस्त्र का प्रयोग करके, हनुमान जी को बेहोश कर देता है और उन्हें नागपश शक्ति से बांधकर सभा में ले जाता है.

रावण को देखकर, हनुमान जी बहुत हंसते हैं. रावण को बताते हैं कि उन्हें प्रभु श्री राम ने भेजा है. तुम सीता जी को छल से चुरा लाए हो. उन्हें वापिस कर दो, नही तो भगवान राम तुम्हें मार देंगे.

यह सुनकर रावण ज़ोर से हँसता है और अपने सैनिकों को हनुमान जी को मारने के लिए आदेश देता है. रावण का भाई विभीषण रावण को समझाता है कि दूत को मारना नियमो के ख़िलाफ़ है. रावण अपनी सभा से पूँछता है कि हनुमान को क्या सजा दी जाए?

सभी लोग कहते हैं कि बंदर को अपनी पूँछ से बहुत प्यार होता है. इसकी पूँछ में आग लगा दो. हनुमान की पूँछ में कपड़ा लपेटने लगे. हनुमान जी ने अपनी पूँछ लम्बी करनी शुरू कर दी. अब वे कपड़ा बांधे जाएँ और हनुमान जी पूँछ लम्बी करते जाए. राज्य का सारा तेल और कपड़ा उनकी पूँछ में ही लग गया. अब पूँछ को आग लगा दी गई.

हनुमान जी की पूँछ में आग लगते ही हनुमान जी ने एक महल से दूसरे महल में कूदना शुरू कर दिया. पूरी लंका को आग लगा दी. सिर्फ़ विभीषण का महल छोड़ दिया. समुद्र में जाकर अपनी पूँछ की आग बुझाई और वापिस लौट गए.
यह बच्चों की अच्छी-अच्छी कहानिया में से एक है Short stories of Ramayana for kids in Hindi.


6. कुम्भकर्ण की नींद Kumbhkaran ki Neend

रामायण में रावण के भाई कुम्भकर्ण भी अद्भुत पात्र हैं. वह अपने बड़े शरीर और अपनी लम्बी और गहरी नींद के करण प्रसिद्ध हुआ. कहा जाता है कि राक्षसों का वंशज होने के बावजूद, कुम्भकर्ण वीर और होशियार था. उसके बल से देवों के राजा इंद्र भी जलते थे.

एक बार तीनो भाई रावण, कुंभकर्ण और विभीषण ब्रह्मा जी की तपस्या कर रहे थे. ब्रह्मा जी उनकी तपस्या से ख़ुश हो गए और वरदान माँगने के लिए कहा.

इंद्र को भय था कि कुम्भकर्ण स्वर्ग का राज न माँग ले. इंद्र ने सरस्वती जी के साथ मिलकर योजना बनाई. सरस्वती जी ने कुम्भकर्ण की जीभ को बांध दिया और कुम्भकर्ण ने इंद्रासन की जगह निद्रासन माँग लिया. ब्रह्मा जी ने तुरंत ही तथास्तु बोल दिया.

रावण सारी योजना भाँप गया, उसने ब्रह्मा जी से वरदान वापिस लेने को कहा. ब्रह्मा जी ने वरदान वापिस लेने की एक शर्त रखी कि कुम्भकर्ण 6 माह सोएगा और 6 महीने जागेगा.

रावण मान गया. राम-रावण के युद्ध के समय भी कुम्भकर्ण सो रहा था. बहुत जगाने के बाद वह नींद से उठा. यह बच्चों की मज़ेदार कहानियों में से एक है. Short stories of Ramayana for kids in Hindi.


7. हनुमान जी को बजरंगबली क्यों कहते हैं और सिंदूर क्यों चढ़ाते है?

श्री राम भक्त हनुमान जी को बजरंगबली क्यों कहा जाता है?, इस संबंध में दो कथाएँ हैं. पहली कथा के अनुसार, यह माना जाता है कि हनुमान जी बहुत बलशाली हैं. उनका शरीर वज्र जैसा है, इसलिए उन्हें बजरंगबली कहते हैं.

दूसरी कथा के अनुसार, माना जाता है कि एक बार सीता माता अपनी माँग में सिंदूर भर रही थी. हनुमान जी ने देवी सीता को सिंदूर लगाते हुए देखा, तो उत्सुकतावश उन्होंने पूँछा कि हे माता, आप सिंदूर क्यों लगाती हैं? उन्होंने उत्तर दिया कि वे अपने पति श्री राम की लम्बी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए माँग में सिंदूर लगाती हैं.

हनुमान जी भगवान राम से बहुत प्यार करते हैं. इसलिए माता सीता की बात सुनकर, उन्होंने सोचा कि अगर थोड़ा-सा सिंदूर लगाने से प्रभु राम का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा तो वे पूरे शरीर पर सिंदूर लगाएँगे. इससे तो भगवान राम अमर हो जाएँगे.

यही सोचकर उन्होंने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया. हनुमान जी को देखकर प्रभु राम ख़ुश हो गए और कहा मैं आपकी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ. आज से लोग आपको बजरंगबली के नाम से जानेंगे. बजरंग का अर्थ नारंगी होता है और बली का अर्थ बलशाली है.


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निष्कर्ष – Conclusion

हम बच्चों के लिए आसान भाषा में रामायण की कहानियां लेकर आए हैं. इन रामायण की लघु कथाओं से बच्चे नैतिकता सीखेंगे. बच्चों की अच्छी-अच्छी कहानियां बच्चों को अच्छाई की बुराई पर जीत, भाई-भाई का प्रेम व त्याग, छल व कपट का बुरा अंत सब कुछ सिखा पाएँगी.

आप एक-एक करके जब ये कहानियां बच्चों को सुनाएँगे, तो अगले दिन बच्चे आपसे Short stories of Ramayana for kids in Hindi सुनने का इंतज़ार करेंगे, ये हमारा दावा है. अगर आपको बच्चों की कहानियां पसंद आएँ तो like करे, subscribe करे. अपने दोस्तों को भी share करे.

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बच्चों को नैतिक मूल्य सिखाएँ,
बहुत सारे प्यार के साथ,
आपकी मित्र विभा


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल – FAQ

Ans. हमें हमेशा नारी का सम्मान करना चाहिए. उनके साथ बुरा व्यवहार नही करना चाहिए. सीता हरण सबसे बड़े युद्ध का कारण बना.
Ans. रावण राक्षसों का राजा था. बलशाली,बुद्धिमान,धनी,शास्त्रों का ज्ञाता और बहुत सारे शस्त्रों का ज्ञान रखने वाला, लेकिन अहंकारी था. उसका विनाश हुआ. हमेशा बुरे कर्म करता था, सबको तंग करता था. दूसरे की स्त्री का अपहरण किया.लेकिन अच्छाई की जीत हुई, श्री राम आज्ञाकारी,विनम्र, त्यागी, दूसरों का भला सोचनेवाले और भाइयों के लिए असीम प्रेम रखने वाले थे.उन्होंने जंगल में रहकर, वानरो की मदद से अहंकारी रावण को मार दिया. रामायण की कहानियां अधर्म पर धर्म की जीत, असत्य पर सत्य की जीत को सिखाती है.

Vibha Sharma

Hi, मैं Vibha Sharma हूँ. मैं एक Child Development Expert और Mom Influencer हूँ. मैं Maonduty की Founder हूँ. मैं तीन बच्चों की माँ हूँ. मेरी बड़ी बेटी Mechanical Engineer है, छोटी बेटी Lawyer है और बेटा Reputed College से Law कर रहा है. मेरे बच्चे हमेशा Scholar रहे. उन्होंने बहुत सारे इनाम जीते Debates, Essay writing, sports, arts, story telling, fancy dress and Theatre etc मैं यहाँ आपको Parenting के पर्सनल अनुभव share कर रही हूँ. मेरा mission 100000000+Parents की parenting journey को Happy and Easy बनाना है 🙏😊❤️ आप मुझे Instagram पर भी follow कर सकते है. मैं वहाँ Calm Parenting tips देती हूँ.😊💐

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